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Sunday, 15 November 2020

कबीर :: शिरडी साईं :: महात्मा गांधी :-

कबीर ने करघे पर बैठकर ऐसी नायाब चादर बुनी, जिसे ऋषि-मुनि सबने ओढ़ी, फिर जस की तस धर दीनी चदरिया। 

साईं बाबा चक्की में रोग-शोक पीसकर सबको मुक्त करते थे, परन्तु बाबा कबीर चलती चाकी देख रोते थे। ‘चलती चाकी देख दिया कबीरा रोय’ अथवा 'चक्की में जाकर कोई साबुत नहीं बचता'। 

साईं बाबा मानते थे, आटे की तरह बिखराे मत, केन्द्र की तरफ जाओ। कबीर के कथन में न गेहूँ बचता है और न घुन। 

साईं बाबा एवं कबीर, दोनों के ही बीच में चक्की जन कल्याण का अद्भुत उपकरण रहा हैं। 

कैसी विचित्र बात है कि, कबीर के चार सौ साल बाद साईं बाबा ने चक्की को जनकल्याण के सन्देश का माध्यम बनाया और साईं बाबा के लगभग पाँच दशक बाद महात्मा गाँधी ने चरखे को परिवर्तन का ज़रिया बनाया। 

जड़ के नीचे तीनाें संताें में एक समानता 'राम' का नाम रहा है। अगर कबीर 'निर्गुण राम' में रमे थे ताे साईं बाबा काे सब 'साईं राम' कह कर भजते हैं तथा गांधी 'हे राम' कह कर उपासना करते थे। यह भी एक जड़ हो सकती है, जिससे ये संत जुड़े थे। 

चक्की व चरखा आध्यात्मिक और सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम बन गये। प्रतीत हाेता है, तीनों संत अपनी-अपनी तरह वैज्ञानिक थे या फिर कहूं ताे "आध्यात्मिक वैज्ञानिक" थे। तीनों ने परिवर्तन के अपने-अपने यन्त्र ढूँढ़ रखे थे, जाे आज भी प्रभावी हैं और भविष्य में भी प्रभावी रहेंगे।
#भारतमेराधर्म
Web link:-
कबीर :: शिरडी साईं :: महात्मा गांधी :- http://a3advocate.blogspot.com/2015/11/blog-post_14.html

Friday, 13 November 2020

श्री साईं सत् चरित्र की प्रति सप्रेंम भेंट द्वारा #अंशुमानदुबे - Part - 2 (020 to 025)

सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ जी की कृपा से साईं बाबा की "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी/English)" की श्री प्रति के निःशुल्क वितरण का आदेश "बाबा" से प्राप्त करKashi Sai Foundation, Varanasi के अध्यक्ष Anshuman Dubey अपने रिश्तेदारों, मित्रों, शुभचिंतकों, अधिवक्ताओं और काशीवासियों को "श्री साईं सत्चरित्र" सप्रेम भेंट करने का पुनीत कार्य साईं बाबा की कृपा से समर्पण करने का प्रयास कर रहें हैं। #बाबाकृपा #श्रद्धाॐसबुरी
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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 20-10-2020ई. मंगलवार को  बाबा साईंनाथ की "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति छोटे भाई कनिष्ठ अधिवक्ता श्री Gaurav Srivastava जी को Kashi Sai Foundation के द्वारा Anshuman Dubey (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
#बाबाकृपा #श्रद्धाॐसबुरी

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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 21-10-2020ई. बुधवार को  बाबा साईंनाथ की "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति बड़े भाई वरिष्ठ अधिवक्ता श्री Rajesh Srivastava जी को Kashi Sai Foundation के द्वारा Anshuman Dubey (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
#बाबाकृपा #श्रद्धाॐसबुरी
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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 25-10-2020ई. रविवार और बाबा की समाधि दिवस विजयादशमी पर्व पर बाबा साईंनाथ की "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति बड़े भ्राता और जीजाजी श्री Dr. Om Prakash Tiwari जी को Kashi Sai Foundation के द्वारा Anshuman Dubey (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
#बाबाकृपा #श्रद्धाॐसबुरी
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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 30-10-2020ई. शुक्रवार और शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति हृदय प्रिय भांजे श्री अंकित पाण्डेय पुत्र स्व. मनोज कुमार पाण्डेय को Kashi Sai Foundation के द्वारा अंशुमान दुबे अधिवक्ता (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
#बाबाकृपा #श्रद्धाॐसबुरी
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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 09-11-2020ई. सोमवार को "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति M/s Anshuman Associates Advocates के प्रतिनिधि Mukesh Vishwakarma (Advocate) को Kashi Sai Foundation के द्वारा अधिवक्ता अंशुमान दुबे वाराणसी (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
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सद्गुरु श्री शिर्डी साईंनाथ महाराज जी की कृपा से आज 09-11-2020ई. सोमवार को "श्री साईं सत् चरित्र (हिन्दी)" की श्रीप्रति हृदय प्रिय भाई श्री Udayan Singh (अधिवक्ता) को Kashi Sai Foundation के द्वारा अंशुमान दुबे अधिवक्ता (अध्यक्ष) ने सप्रेम भेंट साईंबाबा के नाम पर समर्पित किया।
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Thursday, 29 October 2020

जगत् में, कैसा नाता रे।

मन फूला फूला फिरे जगत् में, कैसा नाता रे।

माता कहै यह पुत्र हमारा, बहन कहे बीर मेरा।
भाई कहै यह भुजा हमारी, नारि कहे नर मेरा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।

पैर पकरि के माता रोवे, बांह पकरि के भाई।
लपटि झपटि के तिरिया रोवे, हंस अकेला जाई।।
जगत में कैसा नाता रे ।।

चार जणा मिल गजी बनाई, चढ़ा काठ की घोड़ी ।
चार कोने आग लगाया, फूंक दियो जस होरी।।
जगत में कैसा नाता रे ।।

हाड़ जरे जस लाकड़ी, केस जरे जस घासा।
सोना ऐसी काया जरि गई, कोइ न आयो पासा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।

घर की तिरया देखण लागी ढूंढत फिर चहुँ देशा
कहे कबीर सुनो भई साधु, एक नाम की आसा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
- कबीर साहेब

Thursday, 22 October 2020

बाबा कृपा - ९

बाबा कृपा - ८

बाबा कृपा - ७

बाबा कृपा - ६

बाबा कृपा - ५

बाबा की समाधि के १०० वर्ष 2018


बाबा कृपा - ४

बाबा कृपा - ३

बाबा कृपा - २

बाबा कृपा - १

Wednesday, 4 October 2017

कबीर के लोकप्रिय दोहे :: भाग 3

सुख में सुमिरन ना किया, दु:ख में किया याद।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद॥1॥
अर्थ : कबीरदास जी कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति सुख में ईश्वर को याद नहीं करता हैं और केवल दुःख में भगवन को याद करता हैं तो कबीर के अनुसार इस संसार में उसके दुःख कोई नहीं हर सकता हैं. क्योकि प्रभु आनंदस्वरूप हैं।

साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥ 2 ॥
अर्थ : कबीर ने इस पंक्तियों में स्वयं को धन की मोहमाया से दूर रखने की बात कही हैं. कबीर कहते हैं कि ईश्वर मुझे केवल इतना ही धन देना जिससे मेरा गुज़ारा हो सके और मैं भूखा ना रहूं और ना ही मेरे घर आया कोई अतिथि भूखा जाए।

लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।
पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट॥3॥
अर्थ : कबीर कहते हैं कि व्यक्ति को जब भी समय मिले उसे राम नाम रूपी धन लुट लेना चाहिए, यह प्राण अनिश्चित हैं, निकल जाने के बाद इसका पछतावा रह जायेगा।

Wednesday, 3 May 2017

कबीर के लोकप्रिय दोहे :: भाग 2

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय ॥ 1 ॥
अर्थ :- गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोबिन्द को? ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

बलिहारी गुरु आपनो, घड़ी-घड़ी सौ सौ बार ।
मानुष से देवत किया करत न लागी बार ॥ 2 ॥
अर्थ :- कबीरदास कहते हैं कि मैं अपने गुरु पर प्रत्येक क्षण सैकड़ों बार न्यौछावर जाता हूँ जिसने मुझको बिना विलम्ब के मनुष्य से देवता कर दिया।

कबिरा माला मनहि की, और संसारी भीख ।
माला फेरे हरि मिले, गले रहट के देख ॥ 3 ॥
अर्थ : कबीरदास ने इस दोहे में भीख और माला जपने का विरोध किया हैं. कबीर कहते हैं कि माला मन की फेरनी चाहिए और संसार में भीख मांगने से बुरा और कुछ नहीं हैं. यदि मन की माला फेरी जाए तो हरि मिल जाते हैं बस एक बार चरखें रूपी गले में रखकर देखना हैं।

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...