"स्वयं कष्ट सहन कर मै अपने भक्तो का ध्यान रखता हूँ,
क्योकि भक्त मुझे अपने जीवन से अधिक प्रिय है।"
Love Sai, Live in Sai...!!!
Jai Sai Bharat Prem...!!!
Showing posts with label काशी साईं सुमित अरोरा. Show all posts
Showing posts with label काशी साईं सुमित अरोरा. Show all posts
Sunday, 3 July 2011
Tuesday, 19 January 2010
Wednesday, 28 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 204
साईं ने कहा है, कि.......
"मेरे बिना भक्त के लिए संपूर्ण विश्व ही उजाड़ है, वह केवल मेरी कथाओ का ही गुणगान करते है।"
"मेरे बिना भक्त के लिए संपूर्ण विश्व ही उजाड़ है, वह केवल मेरी कथाओ का ही गुणगान करते है।"
Tuesday, 27 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 203
साईं ने कहा है, कि.....
"प्रेम और श्रद्धा भाव से किया गया, केवल एक नमस्कार ही प्रयाप्त है।"
"प्रेम और श्रद्धा भाव से किया गया, केवल एक नमस्कार ही प्रयाप्त है।"
Monday, 26 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 202
साईं ने कहा है, कि.....
"मुझे ही अपने विचारो व इच्छाओं का लक्ष्य बनाओ, तुम्हे परमार्थ की प्राप्ति होगी।"
"मुझे ही अपने विचारो व इच्छाओं का लक्ष्य बनाओ, तुम्हे परमार्थ की प्राप्ति होगी।"
Sunday, 25 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 201
साईं ने कहा है, कि....
"मस्जिद माई अपना ऋण मांगती है, इसलिए देनेवाला अपना ऋण चुकता कर मुक्त हो जाते है।"
"मस्जिद माई अपना ऋण मांगती है, इसलिए देनेवाला अपना ऋण चुकता कर मुक्त हो जाते है।"
Saturday, 24 October 2009
Friday, 23 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 199
साईं ने कहा है, कि....
"दानी दान देता है और भविष्य में सुंदर उपज का बीजारोपण करता है।"
"दानी दान देता है और भविष्य में सुंदर उपज का बीजारोपण करता है।"
Thursday, 22 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 198
साईं ने कहा है, कि.....
"पिछले जन्मो के कर्मफल को भोग लेना ही मुक्ति का साधन है।"
"पिछले जन्मो के कर्मफल को भोग लेना ही मुक्ति का साधन है।"
Wednesday, 21 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 197
साईं ने कहा है, कि....
"द्वारकामाई अपने बच्चो को हर प्रकार कि खतरे व चिंता से दूर रखती है।"
"द्वारकामाई अपने बच्चो को हर प्रकार कि खतरे व चिंता से दूर रखती है।"
Tuesday, 20 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 196
साईं ने कहा है, कि.....
"जो प्रेम और भक्ति के साथ ईश्वर का ध्यान करते है, प्रभु उनकी सदा सहायता करते है।"
"जो प्रेम और भक्ति के साथ ईश्वर का ध्यान करते है, प्रभु उनकी सदा सहायता करते है।"
Monday, 19 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 195
साईं ने कहा है, कि.....
"जो व्यक्ति अपनी बुद्धि द्वारा मन को वश में कर लेते है, वे अंत में लक्ष्य प्राप्त कर विष्णु लोक में पहुच जाते है।"
"जो व्यक्ति अपनी बुद्धि द्वारा मन को वश में कर लेते है, वे अंत में लक्ष्य प्राप्त कर विष्णु लोक में पहुच जाते है।"
Sunday, 18 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 193
साईं ने कहा है, कि.....
"अहंकारी और विषयो में लिप्त व्यक्ति पर गुरु के उपदेशो तथा शिक्षा का कोई प्रभाव नही पड़ता।"
"अहंकारी और विषयो में लिप्त व्यक्ति पर गुरु के उपदेशो तथा शिक्षा का कोई प्रभाव नही पड़ता।"
Saturday, 17 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 192
साईं ने कहा है, कि......
"धन के प्रति प्रेम, दुःख का गहरा भवर है, केवल इच्छा रहित व्यक्ति इस भवर को पर कर सकता है।"
"धन के प्रति प्रेम, दुःख का गहरा भवर है, केवल इच्छा रहित व्यक्ति इस भवर को पर कर सकता है।"
Friday, 16 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 191
साईं ने कहा है, कि......
"आत्मानुभूति ना तो बुद्धि द्वारा और ना सूक्ष्म वेद अध्यन द्वारा सम्भव है, जिनपर ईश्वर कृपा होती है, केवल वे ही इसे प्राप्त करते है।"
"आत्मानुभूति ना तो बुद्धि द्वारा और ना सूक्ष्म वेद अध्यन द्वारा सम्भव है, जिनपर ईश्वर कृपा होती है, केवल वे ही इसे प्राप्त करते है।"
Thursday, 15 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 190
साईं ने कहा है, कि.....
"आत्मज्ञान गूढ़ और रहस्यमय है, केवल अपने प्रयत्नं से उसकी प्राप्ति सम्भव नही, सिद्ध गुरु की सहायता परम आवश्यक है।"
"आत्मज्ञान गूढ़ और रहस्यमय है, केवल अपने प्रयत्नं से उसकी प्राप्ति सम्भव नही, सिद्ध गुरु की सहायता परम आवश्यक है।"
Wednesday, 14 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 189
साईं ने कहा है, कि.....
"मैं शरीर हूँ एक भ्रम है और यही बंधन का कारण है, जीवन का धेय प्राप्त करने के लिए इस धारणा को त्याग कर दो।"
"मैं शरीर हूँ एक भ्रम है और यही बंधन का कारण है, जीवन का धेय प्राप्त करने के लिए इस धारणा को त्याग कर दो।"
Tuesday, 13 October 2009
Monday, 12 October 2009
साईं ने कहा है : भाग - 187
साईं ने कहा है, कि.....
"ब्रह्मज्ञान या आत्मानुभूति का मार्ग सरल नही, वह तो तलवार की धार पर चलने के समान कठिन है।"
"ब्रह्मज्ञान या आत्मानुभूति का मार्ग सरल नही, वह तो तलवार की धार पर चलने के समान कठिन है।"
Subscribe to:
Posts (Atom)
चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-
उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...
-
संतन जात ना पूछो निरगुनियाँ। साध ब्राहमन साध छत्तरी, साधै जाती बनियाँ। साधनमां छत्तीस कौम है, टेढी तोर पुछनियाँ। साधै नाऊ साधै धोबी, साधै जा...
-
‘Life with Allah has endless hope;life without Allah has hopeless end.’ Islam means submission to the will of Allah. It is a perfect way of ...
-
हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ? रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ? जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमा...