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Thursday, 22 October 2020

मन लाग्यो मेरो यार - कबीर

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

जो सुख पाऊँ "राम" भजन में

सो सुख नाहिं अमीरी में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

भला बुरा सब का सुनलीजै

कर गुजरान गरीबी में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

आखिर यह तन छार मिलेगा

कहाँ फिरत मग़रूरी में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

प्रेम नगर में रहनी हमारी

साहिब मिले "सबूरी" में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

कहत कबीर सुनो भयी साधो

साहिब मिले "सबूरी" में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...