Tuesday, 8 December 2009

को काहू को भाई : नानकदेव

हरि बिनु तेरो को न सहाई।
काकी मात-पिता सुत बनिता, को काहू को भाई॥
धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई।
तन छूटै कुछ संग न चालै, कहा ताहि लपटाई॥
दीन दयाल सदा दु:ख-भंजन, ता सिउ रुचि न बढाई।
नानक कहत जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई॥

Sunday, 6 December 2009

Bar Council to provide pension, compensation to lawyers

Bar Council to provide pension, compensation to lawyers

दुनिया : गुलाब खंडेलवाल

दुनिया न भली है न बुरी है,
यह तो एक पोली बांसुरी है
जिसे आप चाहे जैसे बजा सकते हैं,
चाहे जिस सुर से सजा सकते हैं,
प्रश्न यही है,
आप इस पर क्या गाना चाहते हैं!
हंसना, रोना या केवल गुनगुनाना चाहते हैं!
सब कुछ इसी पर निर्भर करता है
कि आपने इसमें कैसी हवा भरी है,
कौन-सा सुर साधा है-
संगीत की गहराइयों में प्रवेश किया है
या केवल ऊपरी घटाटोप बांधा है,
यों तो हर व्यक्तिअपने तरीके से ही जोर लगाता है,
पर ठीक ढंग से बजानायहां बिरलों को ही आता है,
यदि आपने सही सुरों का चुनाव किया है
और पूरी शक्ति से फूंक मारी
तो बांसुरी आपकी उंगलियों के इशारे पर थिरकेगी,
पर यदि आपने इसमें अपने हृदय की धडकनन
हीं उतारी हैतो जो भी आवाज निकलेगी,
अधूरी ही निकलेगी।

Friday, 4 December 2009

भोजपुर : नागार्जुन (भाग - 2 )

मुन्ना, मुझको
पटना–दिल्ली मत जाने दो
भूमिपुत्र के संग्रामी तेवर लिखने दो
पुलिस दमन का स्वाद मुझे भी तो चखने दो
मुन्ना, मुझे पास आने दो
पटना–दिल्ली मत जाने दो

Thursday, 3 December 2009

झूठी देखी प्रीत : नानकदेव

जगत में झूठी देखी प्रीत।
अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥
मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।
अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥
मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।
नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥

Tuesday, 1 December 2009

भोजपुर : नागार्जुन (भाग - 1 )

यहीं धुआँ मैं ढूँढ़ रहा था
यही आग मैं खोज रहा था
यही गंध थी मुझे चाहिए
बारूदी छर्रें की खुशबू!
ठहरो–ठहरो इन नथनों में इसको भर लूँ...
बारूदी छर्रें की खुशबू!
भोजपुरी माटी सोंधी हैं,
इसका यह अद्भुत सोंधापन!
लहरा उठ्ठीकदम–कदम पर,
इस माटी परमहामुक्ति की अग्नि–गंध
ठहरो–ठहरो इन नथनों में इसको भर लूँ
अपना जनम सकारथ कर लूँ!

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...