Saturday, 14 August 2010

अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा : इक़बाल

अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा
भूले-भटके की रहनुमा हूँ मैं
दिल ने सुनकर कहा-ये सब सच है
पर मुझे भी तो देख क्या हूँ मैं
राज़े-हस्ती* को तू समझती है
और आँखों से देखता हूँ मैं

( *अस्तित्व के रहस्य )

Tuesday, 20 July 2010

काशी साईं प्रेम विचार :-

वाराणसी के एक शिक्षक श्री स्वतंत्र कुमार ने I-next समाचार पत्र में भगवान के सही स्थान के विषय अपने विचार बहुत सुन्दर शब्दों हम सब के सामने रखा है, और क्रमश: यही विचार हमारी संस्था "काशी साईं" के भी है.....!!!


हमारी संस्था I - next और श्री स्वतंत्र कुमार का अभिवादन कर धन्यवाद् देती है, और सभी भारत वाशियों से निवेदन करती है, कि यही भावना अपने मन में भी जागृत कर देश से प्रेम करिए और "भ्रष्टाचार" का हिस्सा बनने से अपने आपको बचाइये।

Sunday, 23 May 2010

काशी साईं आज का विचार:

ॐ श्री साई नाथाय नमः
"मुझे ही अपने विचारों तथा कर्मों का मुख्य ध्येय बना लो और तब तुम्हें निस्संदेह ही परमार्थ की प्रप्ति हो जायेगी । मेरी और अनन्य भाव से देखो तो मैं भी तुम्हारी ओर वैसे ही देखूँगा । इस मसजिद में बैठकर मैं सत्य ही बोलूँगा कि किन्हीं साधनाओं या शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता नही, वरन् केवल गुरु में विश्वास ही पर्याप्त है। पूर्ण विश्वास रखो कि गुरु की कर्ता है और वह धन्य है, जो गुरु की महानता से परिचित हो उसे हरि, हर और ब्रहृ (त्रिमूर्ति) का अवतार समझता है ।"
हर कार्य करते हुए ...
हर पल बाबा का स्मरण करते रहना.......
ॐ श्री साई नाथाय नमः

Saturday, 22 May 2010

संस्था के प्रेरणास्रोत :-


हमारी संस्था के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय पंडित शारदा प्रसाद दुबे की पूर्णयतिथी पर श्रद्धासुमन के साथ उनका चित्र


Wednesday, 21 April 2010

काशी साईं आज का विचार:


महात्मा गाँधी ने कहा है, कि....
"मुठ्ठी भर संकल्पवान लोग,
जिनकी अपने लक्ष्य के प्रति आस्था है,
इतिहास की धारा बदल सकते है।"

Thursday, 8 April 2010

विचारों में बड़ा जादू है,
यह कहने में गिरा भी सकता है,
और उठा भी सकता है,
कोई तलवार इतनी बेदर्दी से नहीं काटता,
जितना की व्यंग्य।
***************************
कहते हैं तमन्ना ना कर उस ख्वाब की जो पूरी न हो सके,
देखो ना उस नजर को जो तुम्हे देख ना सके,
लेकिन हम कहते हैं कोशिश जरुर करना कुछ पाने की,
क्योंकि सौ ख्वाब देखो तो एक तो पूरा होता है,
शायद इन सौ को देखने में
ज़िन्दगी के हर ख्वाब पूरा हो सके।
***************************
जो जिसके चित में बसता है,
वह उससे दूर होते हुए भी दूर नहीं रहता,
निकट ही जान पड़ता है,
इसके विपरीत जो व्यक्ति,
जिसके चित में नहीं रहता,
वह समीप होते हुए भी,
दूर जान पड़ता है।
****************************
ज़िन्दगी कुदरत का दिया अनमोल तोहफा है,
इसे रो कर नहीं हँस कर गुजारो,
ज़िन्दगी जीने के लिए है,
काटने के लिए नहीं।
****************************
माँगा तो क्या माँगा जो अपने लिए माँगा,
दूसरे के आंसू से अपना दामन भीगे,
सच्ची दुआ तो इसे ही कहते है।

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...