अगर आपका मन भी यही कहता है, तो तिरंगे के प्रति अपनी भावना Comment में लिखे।
Thanks a Lot
With Lots of Regards
Anshuman Dubey
Tuesday, 1 February 2011
Sunday, 9 January 2011
साईं चरणों में मेरा नमन
कबूल करना सलाम मेरा,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
~ * ~
अनेक जन्मों से हूं बिछ्डा,
शिर्डी-वाले हे साईं बाबा।
कबूल करना सलाम मेरा,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
मैं अकिन्चन दास हूं तेरा,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
डगमग होती मेरी नाव,
मुझे बचा लो हे साईं बाबा।
मैं तुम्हारा तुम हमारे,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
सारे जहां में तेरा नज़ारा,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
संभालो बिगडी दशा हमारी,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
~ * ~
कबूल करना सलाम मेरा,
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
शिर्डी वाले हे साईं बाबा।
Saturday, 8 January 2011
गुरु भक्ति की पराकाष्ठा :-
गुरु भक्ति की पराकाष्ठा तब पहुँचती है, जब एक मुरीद ( शिष्य ) अपने मुर्शिद ( गुरु ) के लिये पूरी तरह से समर्पित हो जाता है । उसको अपने गुरु के सिवाय कुछ नही दिखता, कुछ नहीं सूझता। एक टीस, एक इंतज़ार रहता है कि कब वो आ मिलेंगे ।
इन शब्दों के जरिये मैने एक मुरीद की मुरादों को व्यक्त करने की कोशिश की है :-
मेरी चाहतों के हाथो मैं मजबूर हूँ,
मेरे इलाही, मेरे मालिक, तेरे नशे मैं चूर हूँ ।
रंग दुनिया के इन आँखों में अब बसते नहीं,
दर्द हो या हो खुशी, दोनों से मसरूफ़ हूँ ।
रंज की गलियों में भटकता हूँ मैं दर-बदर,
नहीं पता है अभी तेरे दर से कितना दूर हूँ ।
शब जब तक टूटती है सहर के उजालों में,
यादें मेरी सिसकती है तेरे ही खयालो में ।
है तड़प जब यहाँ पर तो होगी वहाँ भी,
जानता हूँ तेरे लिये मैं भी मंजिले-मक़सूद हूँ ।
इन शब्दों के जरिये मैने एक मुरीद की मुरादों को व्यक्त करने की कोशिश की है :-
मेरी चाहतों के हाथो मैं मजबूर हूँ,
मेरे इलाही, मेरे मालिक, तेरे नशे मैं चूर हूँ ।
रंग दुनिया के इन आँखों में अब बसते नहीं,
दर्द हो या हो खुशी, दोनों से मसरूफ़ हूँ ।
रंज की गलियों में भटकता हूँ मैं दर-बदर,
नहीं पता है अभी तेरे दर से कितना दूर हूँ ।
शब जब तक टूटती है सहर के उजालों में,
यादें मेरी सिसकती है तेरे ही खयालो में ।
है तड़प जब यहाँ पर तो होगी वहाँ भी,
जानता हूँ तेरे लिये मैं भी मंजिले-मक़सूद हूँ ।
Monday, 3 January 2011
आर. सी.एम. स्पोर्ट्स अवार्ड (R.C.M. Sports Award)
Saturday, 1 January 2011
Monday, 20 December 2010
Thursday, 9 December 2010
हर सांस में हर बोल में साईं नाम की झंकार :-
हर सांस में हर बोल में साईं नाम की झंकार है ।
हर नर मुझे भगवान है हर द्वार मंदिर द्वार है ॥
ये तन रतन जैसा नहीं मन पाप का भण्डार है ।
पंछी बसेरे सा लगे मुझको सकल संसार है ॥
हर डाल में हर पात में जिस नाम की झंकार है ।
उस साईंनाथ के द्वारे तू जा होगा वहीं निस्तार है ॥
अपने पराये बन्धुओं का झूठ का व्यवहार है ।
मनके यहां बिखरे हुये साईं ने पिरोया तार है ॥
हर नर मुझे भगवान है हर द्वार मंदिर द्वार है ॥
ये तन रतन जैसा नहीं मन पाप का भण्डार है ।
पंछी बसेरे सा लगे मुझको सकल संसार है ॥
हर डाल में हर पात में जिस नाम की झंकार है ।
उस साईंनाथ के द्वारे तू जा होगा वहीं निस्तार है ॥
अपने पराये बन्धुओं का झूठ का व्यवहार है ।
मनके यहां बिखरे हुये साईं ने पिरोया तार है ॥
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चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-
उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...
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पर्यावरण शुद्धिकरण व भारत प्रेम की भावना को जागृत करने के लिए आर्या समाज पद्धति से हवन का आयोजन: पारस नाथ यादव (अधिवक्ता), सतेन्द्र कुमार श...
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‘Life with Allah has endless hope;life without Allah has hopeless end.’ Islam means submission to the will of Allah. It is a perfect way of ...


