Friday, 1 January 2010

नव वर्ष - २०१० आप सबके लिए मंगलमय हों




नव वर्ष - 2010 आप सब के लिए मंगलमय हों

साईं ने कहा है, कि.....


  1. "मेरे शब्द सदैव अर्थपूर्ण होते है, खोखले नही

  2. "चाहे तुम अच्छे हों या बुरे, मै तुम्हारी सभी इच्छाये पूर्ण करूँगा क्योकि तुम मेरे हों ।"

  3. "आप अपना विश्वास एक इषित (इच्छा-अनुसार) स्थान पर स्थिर कर ले , इस प्रकार व्यर्थ भटकने से कोई लाभ नही है ।'

  4. "साईं सूक्ष्म तत्व में रहकर भी सभी को मोहित करते है ।"

  5. "मनुष्य अंतकाल में जिस भाव का स्मरण करते हुए शारीर सोचता है , अगले जन्म में उसे योनी में चला जाता है ।"

"" बोलिए अनंतकोटी ब्रह्मंद्नाय्क राजाधिराज योगिराज परब्रम्ह
सचिदानंद सद्गुरु श्री साईं नाथ महाराज की जय .....!! ""

Thursday, 31 December 2009

मोको कहां ढूढे रे बन्दे : कबीर (Kabir)

मोको कहां ढूढे रे बन्दे
मैं तो तेरे पास में
ना तीर्थ मे
ना मूर्त में
ना एकान्त निवास में
ना मंदिर में
ना मस्जिद में
ना काबे कैलास में
मैं तो तेरे पास में बन्दे
मैं तो तेरे पास में
ना मैं जप में
ना मैं तप में
ना मैं बरत उपास में
ना मैं किर्या कर्म में रहता
नहिं जोग सन्यास में
नहिं प्राण में
नहिं पिंड में
ना ब्रह्याण्ड आकाश में
ना मैं प्रकति प्रवार गुफा में
नहिं स्वांसों की स्वांस में
खोजि होए तुरत मिल जाउं
इक पल की तालाश में
कहत कबीर सुनो भई साधो
मैं तो हूँ विश्वास में

English translation by Gurudev Rabindranath Tagore:

O Man, where dost thou seek Me?
Lo! I am beside thee.

I am neither in temple nor in mosque
I am neither in Kaaba nor in Kailash

Neither am I in rites and ceremonies,
nor in Yoga and renunciation.

If thou art a true seeker,
thou shalt at once see Me
thou shalt meet Me in a moment of time.
Kabîr says, "O Sadhu! God is the breath of all breath."

Saturday, 26 December 2009

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई : अमीर खुसरो

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई,
जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई।
छाप तिलक सब छीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाई के
बात अघम कह दीन्हीं रे मोसे नैंना मिला के।
बल बल जाऊँ मैं तोरे रंग रिजना
अपनी सी रंग दीन्हीं रे मोसे नैंना मिला के।
प्रेम वटी का मदवा पिलाय के मतवारी कर दीन्हीं रे
मोसे नैंना मिलाई के।
गोरी गोरी बईयाँ हरी हरी चूरियाँ
बइयाँ पकर हर लीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाई के।
खुसरो निजाम के बल-बल जइए
मोहे सुहागन किन्हीं रे मोसे नैंना मिलाई के।
ऐ री सखी मैं तोसे कहूँ, मैं तोसे कहूँ, छाप तिलक....।

Sunday, 20 December 2009

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार : निदा फ़ाज़ली

मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है बाहों भर संसार


लेके तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव
सबकी पूजा एक सी अलग-अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी कोयल गाये गीत
पूजा घर में मूर्ती मीर के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाम


सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रूप
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप


सपना झरना नींद का जागी आँखें प्यास
पाना खोना खोजना साँसों का इतिहास
चाहे गीता बाचिये या पढ़िये क़ुरान
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...