Thursday, 10 September 2009

Kashi Sai Image : Part - 9


साईं ने कहा है : भाग - 155

साईं ने कहा है, कि.....
"मुझमें पूर्ण विश्वास रखो, भयमुक्त और शांत रहो।"

कौन मिलावै जोगिया हो : मलूकदास

कौन मिलावै जोगिया हो, जोगिया बिन रह्यो न जाय॥
मैं जो प्यासी पीवकी, रटत फिरौं पिउ पीव।
जो जोगिया नहिं मिलिहै हो, तो तुरत निकासूँ जीव॥१॥
गुरुजी अहेरी मैं हिरनी, गुरु मारैं प्रेमका बान।
जेहि लागै सोई जानई हो, और दरद नहिं जान॥२॥
कहै मलूक सुनु जोगिनी रे,तनहिमें मनहिं समाय।
तेरे प्रेमकी कारने जोगी सहज मिला मोहिं आय॥३॥

महिमा साईं नाम की

महिमा साईं नाम की:-
साईं नाम आधार मनवा, साईं नाम आधार।
साईं नाम आधार मनवा, साईं नाम आधार।
साईं सुमिर ले, चित लगा के, छेड़ के मन के तार,
मनवा, साईं नाम आधार। साईं नाम आधार।
साईं सत्य है, नाम प्रभु का, जाप ले बारम्बार,
मनवा, साईं नाम आधार। साईं नाम आधार।
छाया हो घनघोर अँधेरा, जब तेरे चहू ओर,
साईं नाम की अलख जलाकर करले तू उजियार,
मनवा, साईं नाम आधार। साईं नाम आधार।

Wednesday, 9 September 2009

अपनी भूल स्वीकार करना

चेष्टा यह करनी चाहिये कि मतभेद की नौबत ही न आने पाए । अपनी ओर से कोई ऐसी बात मत आने दो जिससे कोई विवाद हो जाए, बल्कि दूसरी ओर से होने वाले विवाद को भी शांतिपूर्वक निबटा देना ही बुद्घिमानी है । अपने द्घारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिये । आपको इस स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का दूसरों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा । यदि आप भूल करके भी उसे स्वीकार नहीं करते तो दूसरों पर उसकी गलत प्रतिक्रिया होगी और क्षमाभाव के बजाय मन में भ्रांत धारणा बनी रहेगी ।

परस्पर विरोध रहने के कारण अनबन चल रही हो, तो उस अनबन को समझौते द्घारा तय कीजिए और आगे के लिये ऐसा ढंग अपनाइए कि समस्या जटिल न होने पाएँ । अनबन का अंत यदि शीघ्र ही नहीं होता, तो वह धीरे-धीरे भीषण रुप धारण कर लेती है और फिर उसका समाधान बहुत कठिन हो जाता है ।

नाम हमारा खाक है : मलूकदास

नाम हमारा खाक है, हम खाकी बन्दे।
खाकही ते पैदा किये, अति गाफिल गन्दे॥१॥
कबहुँ न करते बंदगी, दुनियामें भूले।
आसमानको ताकते, घोड़े चढ़ि फूले॥२॥
जोरू-लड़के खुस किये, साहेब बिसराया।
राह नेकीकी छोड़िके, बुरा अमल कमाया॥३॥
हरदम तिसको यादकर, जिन वजूद सँवारा।
सबै खाक दर खाक है, कुछ समुझ गँवारा॥४॥
हाथी घोड़े खाकके, खाक खानखानी।
कहैं मलूक रहि जायगा, औसाफ निसानी॥५॥

साईं ने कहा है : भाग - 154

साईं ने कहा है, कि.......
"जो मैं देना चाहता हूँ लोग उसे लेने की कोशिश नही करते,
बल्कि वे मुझसे वह मंगाते है जो मैं उन्हें देना नही चाहता।"

चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम संस्कार के बारे में जानने के लिए उनके बनारस के रिश्तेदार श्री शिवविनायक मिश्रा द्वारा दिया गया वर्णन पढ़ना समीचीन होगा:-

उनके शब्दों में—“आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद होने के बाद इलाहाबाद के गांधी आश्रम के एक स...