गुरू और ईश्वर के सम्बंध में कबीर दास जी के दोहे - 3
'कबीर' सतगुर ना मिल्या, रही अधूरी सीष । स्वांग जती का पहरि करि, घरि घरि माँगे भीष ॥ भावार्थ - कबीर कहते हैं -उनकी सीख अधूरी ही रह गयी कि जिन्हें सद्गुरु नहीं मिला । सन्यासी का स्वांग रचकर, भेष बनाकर घर-घर भीख ही माँगते फिरते हैं वे ।
No comments:
Post a Comment