Sunday, 29 December 2013

थैलासीमिया रोगी अधिवक्ता पुत्र के लिए रक्तदान एवं आर्थिक सहायता :-


वाराणसी। आज दिनांक 29-12-2013 को काशी साईं परिवार के आवाहन पर थैलासीमिया रोगी बालक मास्टर रजत मिश्रा, उम्र 10 वर्ष, पुत्र श्री रूद्र नाथ मिश्रा, अधिवक्ता एवं श्रीमती मीना देवी मिश्रा निवासी ए. 2/29, कामेश्वर महादेव, वाराणसी के लिए सरसुंदरलाल हॉस्पिटल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.), वाराणसी के ब्लड बैंक में निम्न लोगों ने रक्तदान कर अपना सहयोग दिया:- 
  1. श्री अंशुमान दूबे, लहरतारा, वाराणसी
  2. श्री चन्द्र भूषण सिंह, लहरतारा, वाराणसी 
  3. श्री रवि प्रकाश जायसवाल, अधिवक्ता, वाराणसी
उक्त रक्तदान के आयोजन में काशी साईं परिवार के सचिव श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) का विशेष योगदान रहा। सचिव श्री अंशुमान दुबे द्वारा सभी रक्तदाताओं को बिस्कुट, आयरन की दवा, मल्टी विटामिन की दवा एवं काशी साईं-स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। उक्त अवसर पर ब्लड बैंक के इंचार्ज श्री आशुतोष, डॉ. अमित पाण्डेय, श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता), मुकेश कुमार विश्वकर्मा (अधिवक्ता), रवि शंकर विश्वकर्मा एवं ब्लड बैंक के सभी कर्मी उपस्थित रहे। ब्लड बैंक, सरसुंदरलाल हॉस्पिटल, बी.एच.यू., वाराणसी का सहयोग सराहनीय और मानवता की सेवा में समार्पित रहा। ब्लड बैंक के सभी कर्मियों को काशी साईं परिवार का कोटिश: धन्यवाद।
 
काशी साईं परिवार के सचिव-श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) द्वारा दवा के लिए थैलासीमिया रोगी बालक मास्टर रजत मिश्रा को रुपये 1,500/- का चेक सं. 066389 दिनांकित 27-12-2013 की आर्थिक सहायता पिता श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता) को उपलब्ध कराया गया। 


रक्तदान करते श्री अंशुमान दूबे, लहरतारा, वाराणसी
श्री अंशुमान दूबे व सचिव-श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) काशी साईं स्मृति चिन्ह के साथ
रक्तदान करते श्री चन्द्र भूषण सिंह, लहरतारा, वाराणसी
श्री चन्द्र भूषण सिंह व सचिव-श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) काशी साईं स्मृति चिन्ह के साथ
रक्तदान करते श्री रवि प्रकाश जायसवाल (अधिवक्ता) वाराणसी
श्री रवि प्रकाश जायसवाल (अधिवक्ता) व श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता) काशी साईं स्मृति चिन्ह के साथ
सचिव-श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) रुपये 1,500/- का चेक श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता) को उपलब्ध कराते हुए
श्री रवि प्रकाश जायसवाल (अधिवक्ता), श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता) एवं सचिव-श्री अंशुमान दुबे

रुपये 1,500/- का चेक सं. 066389 दिनांकित 27-12-2013
 


सहायता करने के लिए सम्पर्क करें :-  
पिता:- श्री रूद्र नाथ मिश्रा (अधिवक्ता) 
मोबाइल- 9336529585. 
अथवा 
काशी साईं परिवार के प्रतिनिधि 
श्री अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) 
मोबाइल- 9335889403. 
~ * ~
वित्तीय सहायता निम्न खाते में जमा कर मो.9415221561 पर SMS कर सूचित करें:-
Kashi Sai Foundation Society, Varanasi
A/c No. 030698720453
State Bank of India
Br. Sigra, Varanasi
MICR Code: 221002010
IFSC Code: SBIN0002614
Bank Contact No. 0542-2226134 


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सवाल: "काशी साईं" संस्था का उदय कैसे हुआ ?

उतर:
काशी के "महान संत कबीर" ने अपने एक दोहे में यह कहा है कि.....

"साईं इतना दीजिए, जामें कुटुम्ब समाये,
मैं भी भूखा ना रहू, साधू ना भूखा जाए।"


बस "संत कबीर" के इसी दोहे से "काशी साईं" संस्था का उदय हुआ है।

(इस के अलावा "महान संत कबीर" ने और भी अनगिन्नत दोहों में "साईं" शब्द का उपयोग किया है।)


काशी साईं फाउंडेशन सोसाइटी के मूल विचार:-

"मानव प्रेम ही ईश्वर प्रेम है"

"साईं मानव प्रेम, साईं ईश्वर प्रेम"
हमारी सोसाइटी का मानना है, कि भारत में "साईं" नाम ही एक ऐसा नाम है, जो बटवारा नहीं करता इसीलिए हमारी सोसाइटी "जय साईं भारत" कहती है...!!
हमारी सोसाइटी का यह प्रयास है, कि साईं के नाम पर पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोया जाये, ताकि भारत में किसी भी किस्म का बटवारा ना रह जाये....!!

"Jai Sai Bharat"

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गुरू र्ब्रह्मा,गुरू र्विष्णुः,गुरू र्देवो महेश्वरः

गुरू र्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥

अखण्ड मण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्

तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥

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जन गण मन : रवीन्द्रनाथ ठाकुर

जन गण मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशिष मागे
गाहे तव जय गाथा
जन गण मंगल दायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे जय हे जय हे
जय जय जय जय हे

Note: इस रचना के यहाँ तक के पदों को भारत के राष्ट्रगान होने का सम्मान प्राप्त है। यहाँ से नीचे दिये गये पद भारतीय राष्ट्रगान का अंग नहीं हैं.

Rest Part:

पतन-अभ्युदय-वन्धुर-पंथा,
युगयुग धावित यात्री,
हे चिर-सारथी,
तव रथ चक्रेमुखरित पथ दिन-रात्रि
दारुण विप्लव-माझे
तव शंखध्वनि बाजे,
संकट-दुख-श्राता,
जन-गण-पथ-परिचायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे

घोर-तिमिर-घन-निविङ-निशीथ
पीङित मुर्च्छित-देशे
जाग्रत दिल तव अविचल मंगल
नत नत-नयने अनिमेष
दुस्वप्ने आतंके
रक्षा करिजे अंके
स्नेहमयी तुमि माता,
जन-गण-दुखत्रायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे

रात्रि प्रभातिल उदिल रविच्छवि
पूरब-उदय-गिरि-भाले, साहे विहन्गम, पूएय समीरण
नव-जीवन-रस ढाले,
तव करुणारुण-रागे
निद्रित भारत जागे
तव चरणे नत माथा,
जय जय जय हे, जय राजेश्वर,
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे