Thursday 28 May 2009

साईं ने कहा है : भाग - 50

साईं ने कहा है, कि....

"जो प्रेमपूर्वक मेरा नाम स्मरण करेगा,

मैं उसकी समस्त इछाये पूर्ण करूँगा ।"


और

मैं मिट्टी के कण-कण में हूँ,

मैं जीवन के क्षण-क्षण में हूँ!

झांके हैं नभ से तारे जो,

उन तारों की टिम-टिम में हूँ!

मैं ही तो हवाओं का वेग हूँ,

मैं ही तो घटाओं का मेघ हूँ!

अहसास करो तुम खुद में ही,

मैं तो हर इक के मन में हूँ!

क्यों फिरता है दर-दर पर तू?

मुझको पाने की चाहत में?

क्यों जलता है पल-पल में तू?

मैं तेरी हर हलचल में हूँ!

कर पलभर तो तू याद मुझे,

ना रहने दूंगा उदास तुझे!

आऊंगा जब पुकारोगे मुझे,

में जन-जन की सुमिरन में हूँ!

मैं मिट्टी के कण-कण में हूँ,

मैं जीवन के क्षण-क्षण में हूँ...

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