‘‘कोई हिन्दू या मुसलमान नहीं है सभी भगवान की सृष्टि में उसके द्वारा सृजित प्राणी हैं।’’हरिद्वार में गुरु नानक ने उन तीर्थयात्रियों को पूर्व की ओर मुँह करके जल तर्पण करते देखा जिनका विश्वास था कि यह जल स्वर्ग में रह रहे उनके पूर्वजों को तृप्त करेगा। हिंदुओं की इस प्राचीन प्रथा को देखकर गुरु नानक जी ने पश्चिम की ओर मुँह करके जल चढ़ाना शुरू कर दिया। जब उनसे ऐसा करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे उसे कुछ सौ मील दूर, अपने खेतों तक पहुँचा रहे हैं। उनका तर्क था, जब हिंदुओं द्वारा तर्पण किया गया जल स्वर्ग तक पहुंच सकता है तो मेरा चढ़ाया जल मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुंच सकता।
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